Ladki ki Shaadi (लड़की की शादी..) ..

Standard

गुप्ता जी के यहाँ पर लड़की हुई
और उनकी चिंताओं में बढ़ोतरी भी हुई|
उनका पहले से एक लड़का तो था ही
गुप्ता जी तो अब भी एक लड़के की ही आशा लगाये हुए थे,
पर अब क्या करें,
भगवान की इच्छा समझ कर गुप्ता जी ने इसे भी स्वीकार लिया|
लड़की के पैदा होते ही
गुप्ता जी अपने आप को जिम्मेदारियों मे दबा पाया|
उसकी शादी का खर्चा,
पढाई का खर्चा, और फिर एक दिन,
सब किसी और के घर!
पर अब क्या करें,
करना तो पड़ेगा ही|
सरकारी नौकरी मे आजकल बड़े शहरों मे कहाँ काम चलता है,
बस गुज़र बसर ही हो पाता है!
ऐसे म ऊंची सोसायटी मे लड़की की शादी कैसे हो?
अगर लड़की की शादी अच्छे से नहीं की तो पूरी सोसायटी मे नाक कट जायेगी|
गुप्ता ज के दिमाग मे आया
एक लड़का तो है ही
उसकी शादी मे अच्छा खासा दहेज़ तो आ ही जायेगा
उससे लड़की की शादी मे कुछ मदद हो जायेगी
और अपना एक सुंदर बंगला भी बन जायेगा!
पर फिर लगा की वो भी शायद पूरा नहीं पड़ेगा,
बड़े शहरों मे घरों के दाम बहुत बढ गए हैं,
काफ़ी पैसा चाहिए होगा!
फिर गुप्ता जी के दिमाग मे आया,
अपनी सरकारी नौकरी मे ऊपर नीचे से पैसा कमाने के काफ़ी तरीके हैं,
क्यों ना उनका ही सदुपयोग किया जाए!
देखते ही देखते गुप्ता जी की आमदनी डबल हो गई|
और गुप्ता जी के घर और लड़की के शादी के सपनों ने भी
और प्रचंड रूप धारण कर लिया|
और दूसरी तरफ़ लड़के की शादी की उमर हो आई थी,
उसके चाल चलन कुछ ज्यादा अच्छे नहीं लग रहे थे,
कुछ स्वतंत्रता सेनानियों के साथ लड़का रहने लगा था,
गुप्ता जी को भी डर लगाने लगा था की लड़का जाने क्या करेगा|
तो एक दिन डायरेक्ट पूछ लिया,
“शादी का क्या प्लान है तेरा?”
तो लड़के ने कहा,
“शादी तो मे कर लूंगा पर दहेज़ नहीं लेने दूँगा”|
गुप्ता के सारे अरमान मिटटी मे मिलने को आ गए,
“लड़की की शादी कैसे होगी फिर?” गुप्ता जी ने प्रश्न उठाया ..
“हम उसकी शादी मे भी कुछ नहीं देंगे” लड़के ने कहा ..
“पर ऐसा लड़का मिलेगा कहाँ?” गुप्ता जी ने गुस्से मे कहा ..
“नहीं मिलेगा तो नहीं करेगी शादी” लड़के ने जवाब दिया …
होश उड़ गए गुप्ता जी के ये सुनकर …
उन्हें लगा लड़का तो हाथ से गया|
अब उनकी चिंताएँ और भी बढ रही थी,
एक तरफ़ नालायक लड़का,
दूसरी तरफ़ कुंवारी लड़की!
लड़की की शादी मे पैसा नहीं लगाया,
तो सारे रिश्तेदार थू थू करेंगे,
और सोसायटी मे उठाने बैठने लायक भी नहीं रहेंगे,
ऐसा सोचकर गुप्ता जी ने अपनी पुश्तैनी जमीन बेच दी,
और बैंक से लोन ले लिया,
और खूब बड़े स्तर पर फंक्शन किया|
शादी मे “डी जे” लगवाया,
१० तरह की काजू बादाम की बर्फियाँ बनवाई,
और खूब धूम धाम से शादी करवाई|
रिश्तेदारों और आस पडोसियों ने
खूब वाह वाही की, सभी बहुत खुश हुए|
आज लड़की की शादी के दस साल बाद भी
गुप्ता जी लोन पूरा नहीं चुका पाये|
आधी तनख्वाह लोन मे चली जाती है,
बाकी मे घर का पूरा खर्च भी नहीं निकल पाता|
दफ्तर के काम मे मशीनीकरण हो जाने के कारण
ऊपर नीचे की कमाई भी अब नहीं हो पाती|
परेशान हो कर उन्होंने अपना घर भी बेच दिया
और अब किराये के घर मे रहते हैं|
लड़का बस इतना ही कमा पाता है की बस अपना खर्चा ख़ुद उठा ले|
और रिश्तेदार और आस पड़ोसी कहते हैं,
“काहे को की थी लड़की की शादी इतने धूम धाम से,
किसने कहा था झूंटी शान दिखाने को?
किसने कहा था, इतना पैसा लगाने को?”
ये सुनकर गुप्ता जी की छाती पर साँप लोट जाते हैं,
“इन्ही रिश्तेदारों और आस पडोसियों को खुश रखने को,
और इन लोगों मे अपनी नाक बचाए रखने के लिए ही तो मैंने
इतना पैसा लगाया था,
और आज ये ही!!!”
धीरे धीरे रिश्तेदारों और आस पडोसियों
ने भी गुप्ता जी के फटे हाल देख कर उनसे मुहँ मोड़ लिया|
और अंत मे गुप्ता जी अपनी नाक नहीं बचा पाये|
आज गुप्ता जी अपनी किस्मत को कोस कर रोते हैं,
खुशी की कोई आशा उन्हें नहीं दिखती,
बैंक का लोन, रोजमर्रा का खर्चा,
मेट्रो शहर मे किराये का घर,
और ये सरकारी नौकरी!

Leave a comment