पहले बाजार में टमाटर, बैंगन बिका करते थे,
आजकल वहां पर लोग बिका करते हैं!
मिश्रा जी के यहाँ पर लड़का हुआ|
मिश्रा जी ने कहा, “में इसे किसी बड़ी कंपनी का मेनेजर बनाऊंगा”|
मैंने पूछा, “क्यों?”
तो कहा, “आजकल मेनेजर बहुत कमाते हैं और सोसायटी में उनकी काफ़ी इज्जत होती है| आजकल महंगाई का जमाना है, प्रक्टिकल हो कर के जीना पड़ता है, भविष्य में सिक्यूरिटी भी तो चाहिए की नहीं?”
मैंने कहा, “ठीक है देखते हैं|”
लड़के को उन्होंने ३ साल का होने पर एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में भरती करा दिया|
मैंने कहा, “आपके घर में तो हिन्दी बोली जाती है, फिर आपने अपने लड़के को इंग्लिश मीडियम स्कूल में भरती क्यों करदिया? प्राथमिक शिक्षा तो मातृभाषा में ही होनी चाहिए, नहीं तो बच्चे को समझने में कठनाई होगी, और बच्चा सब रट लेगा, समझेगा नहीं, उसमें बच्चा भी खुश नहीं रहेगा!”
मिश्रा जी ने कहा, “ये सब बेकार की बातें हैं, इंग्लिश के बिना आजकल कुछ नहीं होता| बाद में जब ये नौकरी करेगा तो इंग्लिश में ही तो इसे बोलना होगा! और आजकल इंग्लिश के बिना कोई नौकरी नहीं देता| प्रेक्टिकल हो कर के जीना होता है इस संसार में!”
मैंने कहा, “ठीक है देखते हैं!”
एक दिन जब में उनके यहाँ पर पंहुचा तो वो बंटी को जमकर फटकार लगा रहे थे|
मैंने पूछा, “क्या हुआ क्यों डांट रहे हो लड़के को?”
तो बताया की उसके एक्जाम में नंबर कम आए थे|
मैंने कहा, “अरे ये तो जानने की कोशिश कीजिये की नंबर कम आए क्यों?”
तो बोले, “इसमें जानना क्या है, दिनभर मस्ती मारता रहता है, जब पड़ने का बोलो तो इसे मक्कारी सूझती है| मन वन थोड़े ही लगता है इसका पढाई में, इससे तो बस मस्ती करवा लो| सिन्सयरिटी तो इसमें है ही नहीं| मेरे माँ बाप ने भी मुझे मार मार कर पढाया था, लगता है मुझे भी इसके साथ यही करना होगा|
इसको समझ में आता नहीं है की आजकल नौकरी पाना कितना कठिन है| आज जिसके पास पैसा है उसकी ही पूछ है, उसके ही संबंध हैं, और वही सुखी है| पैसे के बिना कुछ नहीं होता आजकल| भाई भाई के काम नहीं आता, बेटा बाप के काम नहीं आता|”
मुझे आश्चर्य हो रहा था जिस तरह से वो बंटी के सामने ये सब बोल रहे थे|
पर मैं उनको उस समय समझाने में असमर्थ था, तो वहां से वापस चला आया|
लड़के से मेरी एक दिन अलग से बात हुई तो बोल रहा था,
“ज्यादा मन नहीं लगता मेरा पढाई मैं, बहुत रटना पड़ता है| पर अब क्या करें …”
उसकी बातों मैं मुझे विद्रोह की बदबू आ रही थी|
कुछ सालों के बाद जब लड़के ने दसवी पास कर ली, तब उसका मन आर्ट्स लेने का था| पर मिश्रा जी ने जबस्दास्ती उसे मेथ्स दिलवा दी| मेनेजर जो बनाना था| उनका प्लान था की, लड़के को पहले इंजीनियरिंग कराएँगे फिर “ऍम बी ऐ” कर कर किस्सी कंपनी का मेनेजर बनायेंगे|
लड़का अब घर को छोड़ कर जाए भी कहाँ, और जिस तरह से उसे आर्ट्स के खिलाफ डराया गया था, उसी भी लगा की आर्ट्स लेने बाद आगे कोई फ्यूचर नहीं है| तो उसने मन मानकर मेथ्स ले ली|
मेथ्स के साथ में उसे फिजिक्स और केमेस्ट्री भी पड़ना पड़ता था| आई आई टी का एक्जाम उससे दिलवाया गया| आई आई टी में उसका सेलेक्शन भी हो गया| उसका मन अब “एम् एस सी फिजिक्स” करने को था| लड़के को फिजिक्स में इन्टरेस्ट आने लगा था| पर मिश्रा जी ने उसे जबरदस्ती कंप्यूटर साइंस दिलवा दी|
कहा, “ये फिजिक्स वगेरह में कोई फ्यूचर नहीं है| आगे मेनेजर बनाना है तो कंप्यूटर साइंस एक सीडी है| आजकल टेक्नोमेनेजर की काफ़ी मांग है|”
लड़के ने फिर से अपने मन को मारकर कंप्यूटर साइंस ले ली| और कर भी क्या सकता था| उसकी सुनाने वाला था कौन?
लड़के ने कॉलेज ज्वाइन कर लिया| कॉलेज के तीसरे साल में पता लगा की लड़के का किसी क्रिश्चियन लड़की के साथ चक्कर चल रहा है| मिश्रा जी को पता चलते है वो आग बबूला हो गए|
लड़के को एक दिन फ़ोन लगा हजारों गलियां सुना डाली, और उस लड़की से दूर हो जाने को कहा|
लड़के ने काफ़ी समझाने की कोशिश की, कि ऐसी कोई बात नहीं है, वो बस उसकी फ्रेंड है|
पर अपने लडके की किसी दूसरे धर्म की लड़की की संगत मिश्रा जी जो बर्दाश्त ना थी, तो उन्होंने उसे उस लड़की से दूर हो जाने के लिए काफ़ी डराया धमकाया| लड़का कुछ ना बोला, और उसने उससे बात कम कर दी, पर तब भी कभी कभी कर लिया करता था, जिसका मिश्रा जी को पता ना था|
लड़के के कॉलेज में प्लेसमेंट्स चालू हो गए थे| लड़का प्लेसमेंट्स में बैठा और उसका किसी कंपनी में ४०,००० रुपये का जॉब लग गया| मिश्रा जी काफ़ी खुश थे|
जॉब लगने के एक साल बाद मिश्रा जी ने उससे कहा की अब “एम् बी ऐ” की तयारी चालू कर दे| मिश्रा जी उसे मेनेजर जो देखना चाहते थे| पर इस बार लड़के ने मना कर दिया| वो “एम् बी ऐ” नहीं करना चाहता था| और तो और उसने उस क्रिश्चियन लड़की से अपनी शादी का फैसला भी सुना दिया|
ऐसा लग रहा था की, पूरी उमर से जो ज्वालामुखी लड़के के अन्दर पनप रहा था, वो आज फट गया था| पहले तो वो लाचार था| अपने माँ बाप पर आश्रित था, पर अब उसे कौन रोक सकता था| ख़ुद अपना काफ़ी कमा लेता था, और स्वावलम्बी हो गया था|
मिश्रा जी ने शादी का फैसला सुनकर लड़के को घर से निकल जाने को कहा| लड़का घर से चला गया|
उसने शादी कर ली, और अब दूसरे शहर में रहता है|
मिश्रा जी की धर्मपत्नी कहती हैं, “जाने कौन डायन है वो, जिसने हमारे भोले भले बंटी को फाँस लिया! पूरी जिंदगी भर चूं भी नहीं बोला हमारे सामने और आज .. ये सब जरूर उस कुलटा का ही सिखाया हुआ होगा|”
में यही सोच रहा था, बोलना तो वो चाहता था पहले भी, पर सुनने वाला कोई नहीं था|
दोनों घरों में बात नहीं होती| सुनाने में आया था की अब वो बाप भी बन गया है| उनके यहाँ कुछ महीने पहले ही एक लड़का हुआ है|
ये ख़बर सुनते ही मुझे लगा की चलो अच्छा ही हुआ, शायद बंटी इतने अनुभव झेलने के बाद अपने लड़के को तो इस बाजार की बलि नहीं चड़ने देगा जिसकी वो ख़ुद चड़ा|
पहले ही मेरी आंखों के सामने एक घर तो इस बाजार में बिक ही चुका था|
Jul24