मरना क्या है?

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जब में छोटा था,
बहुत मस्ती किया करता था|
लगता था, यही जीना है|
बहुत सवाल जवाब किया करता था,
लगता था यही जीना है|
बहुत खुश रहा करता था,
लगता था यही जीना है|
फिर आ गए स्कूल में,
अध्यापक ने कहा,
माँ बाप ने भी कहा
सफल होना ही जीना है,
मान लिए उसे बिना सवाल किए,
क्लास में फर्स्ट आना जीना मान लिए,
लाते रहे नम्बर, जीते रहे वैसे ही,
पर कहीं कुछ कमी लगती थी,
नम्बर ला ला कर मन ऊब गया था,
पढने को ज्यादा मन नहीं करता था,
तो एक दिन माँ को कह दिया,
“में नहीं पढूंगा कल से
मन नहीं लगता मेरा पढाई में”
तो माँ ने कहा,
“पढाई किसको अच्छी लगाती है बेटा
पर करनी तो पड़ती ही है,
तू भी कर ले,
सफल होने के लिए पढाई करना जरूरी है”
तो करते रहे पढाई,
पढते रहे वो सब,
बिना जाने क्यों पड़ रहे हैं,
रटते रहे दिन रात,
लाते रहे नम्बर|
माँ बाप कहते थे,
बस दसवी पास कर ले,
फिर जीवन आसान हो जायेगा,
रट रट कर पास कर ली दसवी,
पर जीवन आसान नहीं हुआ|
फिर कहा बस आई आई टी पास कर ले,
फिर जीवन आसान हो जायेगा,
लग गए आई आई टी की रटाई में,
समझ लिया कुछ कुछ,
जो समझ नहीं आया, रट लिया,
दे आए एक्जाम,
नहीं हुआ आई आई टी में,
एक साल और रूककर पढाई की,
फिर आई पीछे रेंक आई आई टी में,
तों आ गए ट्रिपल आई टी में,
तब लगा अब लाइफ आसान हो जायेगी,
पर माँ बाप ने कहा,
बस पड़ ले ये 4 साल और फिर लाइफ आसान हो जायेगी,
ऊब चुका था में ये सुन सुन कर,
पर नौकरी के लिए मुझे पड़ना तों था ही,
फ़ैल ना हो जाएँ,
पढते रहे इस डर से,
मान लिए थे की नौकरी पा कर,
लाइफ आसान हो जायेगी,
गुजार लिए वो चार साल भी,
रट रट कर,
आ गए नौकरी में,
पर लाइफ आसान नहीं हुई,
अब वो कहते हैं,
MBA कर ले बेटा,
आजकल उसका बहुत चलन है,
उसके बाद बस मजे ही मजे,
पर नहीं मानने को मन करता उनकी बातें अब,
सफलता की परिभाषा हर बार बदल जाती है,
एक चीज़ पा लो,
तों कुछ और सफलता कहलाई जाने लगाती है,
वो कहते हैं,
सफलता एक यात्रा है, अंत नहीं,
अगर ऐसा है,
तों में यही कहूँगा की उस यात्रा में सुख नहीं,
सुख के बिना मजा नहीं,
मजे के बिना जीना नहीं,
अगर यही जीना है यारों,
तों मरना क्या है?

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