अर्थ बदल रहे हैं ..

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शब्द वही हैं मगर,
अर्थ बदल रहे हैं ..
धुन वही है मगर,
सुनने के नज़रिए बदल रहे हैं|

पत्थर वही है मगर,
देखने के अंदाज़ बदल रहे हैं|
लोग वही हैं मगर,
संबंध के भावः बदल रहे हैं|

वास्तविकता वही है मगर,
दृष्टि बदल रही है|
सत्य तो वही है मगर,
उसे ग्रहण करने की पात्रता बदल रही है|

सीडी दर सीडी कर के,
वास्तविकता खुद को उदघाटित कर रही है,
मैंने तो एक कदम ही बढाया था मगर,
अब यह मुझको अपनी ओर आकर्षित कर रही है|

स्तब्ध रह जाता हूँ में,
यह अत्भुद रचना को देख कर,
दृश्य वही है मगर,
सुन्दरता की परिभाषा बदल रही है|

अस्थिरता की प्रत्यक्षता,
और स्थिरता का अनुमान लिए,
आगे बढता हूँ मैं,
अनुमान की दृढ़ता से,
खुद में अधिक स्थिरता महसूस करता हूँ मैं,
और आगे बढता हूँ मैं|

4 responses »

  1. सुन्दर कविता है।

    आप विराम के लिये | प्रयोग कर रहें हैं। यह पाइप कहलाता है। विराम के लिये सही चिन्ह । क्यों नहीं प्रयोग करते।

  2. मैं एक हिन्दी फीड एग्रेगेटर यहां पर पहले कॉलम में चलाता हूं। वहां आपकी चिट्ठी आयी थी उसे से यहां तक पहुंचा।

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