शब्द वही हैं मगर,
अर्थ बदल रहे हैं ..
धुन वही है मगर,
सुनने के नज़रिए बदल रहे हैं|
पत्थर वही है मगर,
देखने के अंदाज़ बदल रहे हैं|
लोग वही हैं मगर,
संबंध के भावः बदल रहे हैं|
वास्तविकता वही है मगर,
दृष्टि बदल रही है|
सत्य तो वही है मगर,
उसे ग्रहण करने की पात्रता बदल रही है|
सीडी दर सीडी कर के,
वास्तविकता खुद को उदघाटित कर रही है,
मैंने तो एक कदम ही बढाया था मगर,
अब यह मुझको अपनी ओर आकर्षित कर रही है|
स्तब्ध रह जाता हूँ में,
यह अत्भुद रचना को देख कर,
दृश्य वही है मगर,
सुन्दरता की परिभाषा बदल रही है|
अस्थिरता की प्रत्यक्षता,
और स्थिरता का अनुमान लिए,
आगे बढता हूँ मैं,
अनुमान की दृढ़ता से,
खुद में अधिक स्थिरता महसूस करता हूँ मैं,
और आगे बढता हूँ मैं|
सुन्दर कविता है।
आप विराम के लिये | प्रयोग कर रहें हैं। यह पाइप कहलाता है। विराम के लिये सही चिन्ह । क्यों नहीं प्रयोग करते।
@Unmukt:
Thanks for you comment 🙂
How did you get link to my blog.
Keep reading and commenting.
मैं एक हिन्दी फीड एग्रेगेटर यहां पर पहले कॉलम में चलाता हूं। वहां आपकी चिट्ठी आयी थी उसे से यहां तक पहुंचा।
Very Nice 🙂