Naak Kat Jaayegi! (नाक कट जायेगी!)

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वो कहते हैं, ऐसा नहीं किया तो समाज में नाक कट जायेगी, वैसा नहीं किया तो समाज में नाक कट जायेगी|
में सोच रहा था, नाक तो आप कैसा भी करें काटने वाले लोग तो काट ही देंगे|
लोग उस्तरा लिए बाजार में फिरते रहते हैं इस ताक में की जैसे ही कोई दिखे उसकी नाक काट दें|
अच्छी लम्बी नाक आजकल लोग कहाँ रख पाते हैं?
वो कहते हैं, अच्छी लम्बी नाक रखना एक कला है, आपको पता होने चाहिए की लोग क्या चाहते हैं, बस वैसा करते रहिये, और आपकी नाक बची रहेगी| जिस वस्तु को अच्छी लम्बी नाक का आधार माना गया है उसे पाइए और और अपनी नाक बढाइये|
में यही सोच रहा था की या तो लोगों की नाक बहुत नरम हो गई है, या फिर काटने वालों का उस्तरा काफ़ी तेज़|
कपूर साहब का लड़का शादी के लायक हो गया था| इधर उधर वो बात चला रहे थे| घर में आने वाला नाइ भी रोज रोज एक ने लड़की की तस्वीर ले कर के आता था| कपूर साहब चाहते थे की लड़का किसी अमीर घराने में शादी करे, जिससे काफ़ी पैसा भी अपने पास आ जायेगा और समाज में नाक भी और लम्बी हो जायेगी|
उधर लड़के के कुछ अलग ही ख्वाब थे| उसके मन में पहले से ही कोई अप्सरा बसी हुई थी| वो उसके कॉलेज में ही पड़ती थी| दूसरे धर्मं की थी| लड़के को पता था की अगर उसने ये बात घर पर बता दी तो दंगे फसाद हो जायेंगे| काफ़ी दिनों तक वो इसलिए वो चुप रहा| पर अब जब उसकी शादी की बात घर पर होने लगी थी तो उसे डर लगने लगा की मुझे कहीं जबरदस्ती किसी ऐरी गैरी खूँटी से ना बाँध दिया जाए| तो उसने निर्णय लिया की वो घर पर सब सच सच बता देगा|
उसने काफ़ी दिनों तक हिम्मत जुटाने की कोशिश की और एक दिन जब उसे लगा की उसने पर्याप्त हिम्मत जुटा ली है तो उसने घर पर बता दिया| जिस बात का घर वालों वेशेशतः कपूर साहब को डर लगा, वह थी की अगर लड़के की शादी दूसरे धर्मं की लड़की से कर दी तो समाज में नाक कट जायेगी| लोग कहेंगे की कपूर साहब ने अपने लड़के को सही से लगाम लगा कर नहीं रखा| कपूर साहब ने लड़के के इस प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया| लड़का भी लड़की के मोह में पागल था, वो भी अपनी बात पे अड़ गया की में अगर शादी करूँगा तो इस लड़की से ही करूँगा नहीं तो घर से भाग कर शादी कर लूंगा|
कपूर साहब को अपने दोस्तों से शादी के सिलसिले में की हुई बातें याद आ रही थी| वो हमेशा से ही अंतर्धर्मी शादियों के खिलाफ थे| उन्हें यही लग रहा था की जब मिश्रा साहब के लड़के ने इसी तरह दूसरे धर्म की लड़की से शादी की थी, तो वो आलोचना करने वाले लोगों में सबसे आगे थे, और अब अगर उनके ख़ुद के लड़के ने वोही कर दिया, तो लोग उनका जीना हराम कर देंगे| इस तरह की काफ़ी सारी बातें कपूर साहब को डराने लगी| पर दूसरी तरफ़ लड़के को संभाल पाना कपूर साहब के लिए मुश्किल हो रहा था| अंततः कपूर साहब अपनी बात पर अड़ गए और कहा, “मेरी अनुमति नहीं है इस शादी में”| लड़का कुछ नहीं बोला और वहाँ से चला गया|
दूसरे दिन लड़के का घर पर फ़ोन आया, उसने कहा, “मैंने कोर्ट में शादी कर ली है| अगर आप लोगों को स्वीकार हो तो में घर आ जाता हूँ, नहीं तो कहीं और जा कर रह लूंगा”|
लड़के की हिम्मत देख कर कपूर साहब के होश उड़ गए| कपूर साहब को ज्यादा चिंता इस बात की थी की अगर ये बात बाहर फ़ैल गई तो उनकी पूरी सोसायटी में नाक कट जायेगी| वो इस बात पर काफ़ी डर गए थे|
उन्होंने लड़के को कहा, “बेटा तू घर पर वापस आजा, हमें तू स्वीकार है!”
लड़के को अपने सुने पर विश्वास ही नहीं हो रहा था, “इतने कट्टरवादी माता, पिता इतनी जल्दी कैसे मान सकते हैं” उसने मन में सोचा| फिर भी हिम्मत कर के लड़का घर पर पंहुचा|
सबने घर पर उसका काफ़ी स्वागत किया| लड़का हैरान था की हो क्या रहा है| उसे लगा की रातों रात ये काया पलट कैसे हो गया|
पिता ने लड़के के सामने प्रस्ताव रखा, “बेटा हम चाहते हैं की तू विधिवत हिंदू परम्परा के तहत शादी कर ले, और हम चाहते हैं की हम तेरी शादी काफ़ी धूम धाम से करें और सभी रिश्तेदारों को बुलाएं|”
लड़के को दुबारा से काफ़ी बड़ा झटका लगा| वो हैरान था ये सब देख कर| उसने अपने पिता को जो वो चाहते थे वो कर लेने की अनुमति देदी|
फिर हुई शादी काफ़ी धूम धाम से| सभी रिश्तेदारों, आस पडोसियों को बुलाया गया|
सभी लोग ये बात महसूस कर पा रहे थे की कपूर साहब की नाक कटी नहीं, बल्कि और लम्बी हो गई है|
सुनने में आया था की जिन लोगों से कपूर साहब की बात हुई शादी में उन्हें उन्होंने कहा, “भई देखिये मैं तो काफ़ी खुले विचारों वाला आदमी हूँ| अब लड़के ने अपनी इच्छा ज़ाहिर की और मैंने बिना कोई प्रश्न किए हाँ कर दिया| अब भई बच्चों की खुशी मैं ही तो हमारी खुशी है ना| अब ये धर्म वगेरह की कट्टरवादिता को हम कब तक ढोयेंगे|”
और इस तरह से कपूर साहब ने अपनी नाक को कट्ने से तो बचा ही लिया बल्कि और लंबा भी कर लिया|
घर पर अब ये आलम हैं, जब भी कपूर साहब अपनी दूसरे धर्म की बहू को देखते हैं तो उनकी आंखों मैं खून उतर आता है, पर अपनी लाचारी को वे अपने “खुले विचारों” से ढक लेते हैं|

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